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Thursday, March 19, 2020

Don't Do What They Want

कोरोना के भय से वह न करें जो यह षड्यंत्रकारी करवाना चाहते है

कोरोना कोई नया वायरस नहीं है अपितु वायरस के एक समूह का नाम है
इसके अंतर्गत सामान्य सर्दी जुकाम को यदि आप टेस्ट करवाने चले जाएँ तो संभव है की आपके शरीर में कोरोना वायरस हो और यह सामान्य स्थिति है कोई आपातकाल स्थिति नहीं। चीन वाला वायरस का जो स्वरूप है है तो कोरोना परन्तु नया सदस्य है जिसे किसी षड्यंत्र के अंतर्गत उत्पन्न करें अनावश्यक रूप से प्रचारित कर भय का वातावरण अपने बाजार को बढ़ने के लिए कर रहे है।

अतः अपने परिवार में भारतीय पद्धति के अनुसार दिनचर्या रखें जिस से किसी भी प्रकार का वायरस का दुष्प्रभाव न करें और यदि आ जाए तो शरीर स्वयं उसको समाप्त करने की क्षमता रखें

किसी भी वायरस के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता हेतु गोधूलि के इन उत्पादों की सहायता लें
कोरोना के भय से पैसा वहाँ खर्च न करें जहाँ यह षड्यंत्रकारी करवाना चाहते है अपितु वहां करें जहाँ से इनका लाभ न हो। स्वदेशी, भारतीयता एवं गोमाता के विचार का जहाँ से प्रचार हो

जनहित में प्रेषित
Gaudhuli.com

Friday, February 21, 2020

हिन्दू विचार ऐसे होते हैं

स्वयंसेवक हर व्यक्ति के मन में हिंदुत्व का भाव जगाएं, व्यक्ति की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि हिंदू से होनी चाहिए, इसकी शुरुआत अपने घर और कार्यक्षेत्र से करें 

घर में काम करने वाली बाई हो या ड्राइवर सफाई कर्मचारी या कपड़े धोने वाला उसे सहजता से हिंदुत्व की विचारधारा से जोड़ें, मलिन बस्तियों में जाकर उनका दर्द समझें और घुल मिल जाए उनके साथ भोजन करें उन्हें हिंदू होने पर गर्व कराएं

संघ की लंबी यात्रा में सामने आया है कि जाति व्यवस्था जाने वाली है हम विषमता में विश्वास नहीं रखते। 

ऐसा वातावरण नहीं होना चाहिए कि किसी जाति से किसी की पहचान हो सभी की पहचान हिंदू से होनी चाहिए।
 
स्वयंसेवक मलिन बस्तियों में जाएं, वहां रहने वालों का दर्द समझें, उनके साथ भोजन करें और घुले मिले। 

किसी भी विरोध की परवाह किए बगैर कुरीतियां खत्म करनी है और अपनी मंजिल तक पहुंचना है अगर हम सफाई कर्मचारी से भेदभाव करेंगे, जाति बीच में आएगी तो समस्या होगी 

किसी पर विचार थोपने से वह उसे कभी आत्मसात नहीं करता जब वह मानसिक रूप से इसके लिए तैयार होगा तभी उसे स्वीकारेगा
 
-डॉ मोहन भागवत

तुम जमीर को बेच दिए,केवल बिजली व पानी पर

भारत माता सिसक रही हैं,तुम सब की नादानी पर,
तुम जमीर को बेच दिए, केवल बिजली व पानी पर ।।

तुम बोले मंदिर बनवाओ, 'उसने' काँटा साफ किया,
और तीन सौ सत्तर धारा वाला स्विच ही ऑफ किया,
इच्छा यही तुम्हारी थी,घुसपैठी भागें भारत से,
लाकर के कानून हौंसला घुसपैठी का हाफ किया।

राणा-वीर शिवा के वंशज,रीझे कुटिल कहानी पर।
तुम जमीर को बेच दिए,केवल बिजली व पानी पर ।।1।।

रेप किए, छाती काटा, माँ-बहनों सँग हैवानी की,
याद न आया चार लाख हिंदू के करुण कहानी की,
न्याय दिलाना चाहा 'वो' तो तुमने ये अंजाम दिया?
थूकेगा इतिहास, करेगा मंथन  कारस्तानी की ।

अपनों से ज्यादा विश्वास किए तुम पाकिस्तानी पर।
तुम जमीर को बेंच दिए,केवल बिजली व पानी पर ।।2।।

'उनके' बच्चे-बच्चे समझें,किसको वोट नहीं देना,
टुकड़े-टुकड़े करें देश का,फिर भी खोट नहीं देना,
'तीन तलाक' महामारी, आजाद किया खातूनों को,
लेकिन धरने पर बैठी हैं,पति को चोट नहीं देना।

कैसे कोई करे भरोसा,अपने हिंदुस्तानी पर।
तुम जमीर को बेंच दिए,केवल बिजली व पानी पर।।3।।

क्या कसूर था 'सीएए' पर, 'वो' अड़ गया बताओ तो?
क्या कसूर था पाकिस्तानी पर चढ़ गया बताओ तो?
तुमने जो-जो मांग किया, सब पर कानून बनाया 'वो'
यदि 'एनारसी' पर थोड़ा आगे बढ़ गया बताओ तो?

गांधी-नानक की धरती पर, वोट किए हैवानी पर,
तुम जमीर को बेंच दिए,केवल बिजली व पानी पर ।।4।।

सीट तीन सौ तीन मिली थी,फिर क्यों रिस्क उठाया 'वो'?
भ्रष्टाचारी एक हुए सब,फिर भी क्या घबराया 'वो' ?
तुम पर 'उसे' भरोसा था,इस खातिर कदम बढ़ाया 'वो',
'तुम रोहिंग्या के साथी हो', इतना समझ न पाया 'वो'!

देखो 'वे' सब एक हो गईं,पत्तल भर बिरियानी पर।
तुम जमीर को बेंच दिए,केवल बिजली व पानी पर ।।5।।

पन्नादाई अगर सुनीं तो तुम सबको दुत्कारेंगी,
लक्ष्मीबाई वहाँ स्वर्ग से थूकेंगी,फटकारेंगी,
जीजाबाई रोंएंगी,बिलखेंगी,तुम्हें निहारेंगी,
बस यात्रा क्या मिली मुफ्त, द्रोही को आप सँवारेंगी?

दिल्ली की महिलाएं रीझीं,अफजल और गिलानी पर।
तुम जमीर को बेंच दिए,केवल बिजली व पानी पर ।।6।।

जीत नहीं ये झाड़ू की है, तालीबानी जीत गए,
शाहिनबाग नहीं जीता है,अफजल -बानी जीत गए,
जेएनयू जीता है अबकी,रोहिंग्या भी जीत गए,
सच्चे हिंदुस्तानी हारे, पाकिस्तानी जीत गए।

एक वोट भी दे नहिं पाए,शहीदों की कुर्बानी पर।
तुम जमीर को बेंच दिए, केवल बिजली व पानी पर ।।7।।

साभार - सुरेश मिश्र
(हास्य कवि, मुंबई)